रिपोस्ट :- अग्निपथ (ख़ास समीर लाल समीर जी के लिए)
समीर भाई , बच्चन जी की यह कविता आप पर सटीक बैठती है सो पेश है .................वृक्ष हो बड़े भले,हो घने हो भले,एक पत्र छाह भी मांग मत, मांग मत, मांग मत,अग्निपथ, अग्निपथ अग्निपथ;तू न थमेगा कभी तू न मुदेगा कभी तू न रुकेगा कभी,कर शपथ, कर शपथ, कर...
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शिवम् मिश्रा
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[13 May 2010 15:47 PM]



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