अभिनय

दर्शन-प्राशन कर रहे चपल चख थिर अभिनय हैं बोल रहे द्वय विंशति वय.हो गयी हमारी, तुम बोलो — "क्या पीया आपने पावन पय."ना, नहीं अभी है संशयमय मम दशा, हलाहल अथवा पय मैं जान नहीं पाता सचमुच हैं कौन वस्तु जिससे हो जय. " 'बहुजन हिताय' विष अमृतमय 'है सुधा' वासनामयी सभय."— यह... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul
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[13 May 2010 15:53 PM]

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