डर....(पूर्णेंदु शुक्ल की छोटी कविता)
केव्स के वरिष्ठ साथी पूर्णेंदु शुक्ल जी ने एक बेहद छोटी सी पर उतनी ही गहरी कविता लिखी है...नई कविता आप भी पढ़ें......डर...वह बच्चा था और तब उसे हमेशा मरने से डर लगता था....अब... वो बड़ा हो चुका है और... ज़िंदगी से डरता है...पूर्णेंदु शुक्ल(लेखक पत्रकार...
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मयंक
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[13 May 2010 15:51 PM]



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