आलोचना, चाटुकारिता और निन्दा - अपराध और परिवीक्षा
हमारे पास माध्यम के रूप में सब से पहले काव्य कृतियाँ सामने आईं जो लिखित न होते हुए भी श्रुति से हमारे बीच थीं। इन कृतियों में सब कुछ था। जीवन था, जीवन का दर्शन था, जगत की व्युत्पत्ति की व्याख्या थी, सौन्दर्य था, अभिव्यक्ति थी और भी बहुत कुछ था। श्रुति के...
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[13 May 2010 15:19 PM]



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