भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल'
भोजपुरी दोहे:संजीव 'सलिल'*नेह-छोह रखाब सदा, आपन मन के जोश.सत्ता दान बल पाइ त, 'सलिल; न छाँड़ब होश..*कइसे बिसरब नियति के, मन में लगल कचोट.खरे-खरे पीछे रहल, आगे आइल खोट..*जीए के सहरा गइल, आरच्छन के हाथ.अनदेखी काबलियत कs, लख- हरि पीटल माथ..*आस बन गइल सांस...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[13 May 2010 14:17 PM]



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