भर्त्सना हो या जय जयकार, कोई मुझतक नहीं पहुचेगी…

मेरे विचार, मेरी कवितायें छोड़ जाऊँगा कुछ कविता, कुछ कहानियाँ, कुछ विचार जिनमें होंगे कुछ प्यार के फूल कुछ तुम्हारे उसके दर्द की कथाएं कुछ समय – चिंताएं मेरे जाने के बाद ये मेरे नहीं होंगे मै कहाँ जाऊँगा, किधर जाऊँगा लौटकर आऊँगा कि नहीं कुछ पता नहीं लौटकर आया भी तो न मै इन्हे... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)

कुछ एं वें ही

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[13 May 2010 13:23 PM]

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