समझौता

कस्बे का कवि... रोज़ सुबह आता है दूधवालाऔर पानी मिला दूधजग में डालकर चला जाता हैरोज़ डाँटता हूँ उसेधमकी देता हूँ दूध बंद देने कीमुस्कुराता है दूधवालाऔर रोज़ की तरहसाइकिल की घंटी बजाते हुएआगे निकल जाता हैरोज़ शुरु होता है दिनइस छोटे-सेसमझौते के साथ.... [पूरी पोस्ट]
writer मणिमोहन
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[13 May 2010 10:15 AM]

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