कहानी- वह चली गई तो..
घर के तीनों कमरे में बारी-बारी से जाकर वे फिर से अपने पढने की मेज-कुर्सी पर लौट आए। उनके चेहरे पर झल्लाहट साफ नजर आ रही थी। छत पर पंखा मद्धम गति से घूम रहा था। उन्होंने अपनी गर्दन उठाकर एक उचटती निगाह उस पर डाली और मेज पर औंधी रखी किताब को पलटकर फिर से...
[पूरी पोस्ट]
रतन चंद रत्नेश
कहानी
21
3
0
3
3
[13 May 2010 10:36 AM]



Shuffle








