मैं भीग जाता हूँ

zindagi जब भी तेरे गेसुओं से टपकती बूँदेंगिरती हैं मेरे ह्रदय नभ परमैं भीग जाता हूँ जब भी तेरे अधरों परकुछ कहते -कहतेलफ्ज़ रुक जाते हैंमैं भीग जाता हूँजब भी तेरी पेशानी परचुहचुहाती बूँदेंचाँदनी सी आभाबिखेरती हैंमैं भीग जाता हूँजब भी... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[13 May 2010 09:00 AM]

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