एम्पैथी

दृष्टिकोण कुर्सी के ठीक सिरे पर कूल्हा जमाये उसका बैठना वैसे भी कष्टप्रद था। ऊपर से सारा शरीर जैसे अंदर की ओर सिकुड़ा हुआ। जैसे गर्भाशय में,... अधेड़ उम्र,पके हुए बाल,माथा दोनो हाथों की उँगलियों से ढँका हुआ। उसने अचानक ही नज़र ऊपर की थी। शायद मेरे नीरिक्षण से ही... [पूरी पोस्ट]
writer Beji
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[13 May 2010 07:30 AM]

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