सिर्फ तुम्हारे लिए !
......... बरसों से दिल की तलहटी में दबी हुई कुछ बेसूद उम्मीदें और बेकार सी बातें कुछ बेपर्दा ख्याल और बेनूर ख्वाबकुछ बेज़ार ख्वाहिशें और बेरब्त तमन्नाएं दिल की क़ैद से बाहर आने को बेताब हैंमैं भी तलाश रहा हूँ उन शब्दों को जो समेट...
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निर्झर'नीर
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[13 May 2010 06:39 AM]



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