वक्त का बायस्कोप
जब भी खुद से रूबरू होने का दिल करता है,घर की छत पर जाती हूँ ,टहलती हूँ ......छत से देखूं तो एक तरफ दौड़ती भागती सड़कें दिखती हैं और दूसरी ओर है कब्रिस्तान.छत से वहाँ मुझे सिर्फ बहुत से पत्थर दिखाई देते हैं जो स्मृति चिन्ह जैसे लगाये हुए हैं.सब से बेखबर...
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अल्पना वर्मा
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[13 May 2010 05:02 AM]



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