(ग़ज़ल)-शायद
Shareमेरी ही तरह उदास हो शायद बीते लम्हों के साथ हो शायद कोई बातें वफ़ा की करता हो झील वो पानी पानी हो शायद उसकी छत पे मेरी छत जैसा आसमान आसमानी हो शायद रात भर बीता वक्त पढ़ना हो नींद सुबह बुलानी हो शायद टूटे ख्वाबों के कोयले लेकर दिल अंगीठी जलानी हो...
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माणिक
ग़ज़ल
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[13 May 2010 04:25 AM]



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