फाँसी बनी गले की फाँस
कसाब को फाँसी, कोली को फाँसी....अब और कोई बचा है? नहीं बचा? चलो कोई बात नहीं...।देशवासी फैसले आने के बाद प्रसन्न दिखे किन्तु मन में कुछ इसी तरह के विचार उभरे। अब देखिये कि कब तक फाँसी होती है? अभी तो पहले के 29 बकाया हैं, भले ही राष्ट्रपति जी के पास...
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डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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[13 May 2010 03:50 AM]



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