ए जालिम तू हँस ले जी भरकर...
ए जालिम तू हँस ले जी भरकरमेरे इन ताजे जख्मों को कुरेदकर.तेरा भी कल ऐसा वक्त आयेगातू जियेगा जब आहें भरभर कर । 0000जब याद किसी की आती हैए दिल मेरा बेकाबू हो जाता है .दिल को मेरे चैन तब आता हैजब दिलरुबा मेरे सामने होती है। 00000...
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महेन्द्र मिश्र
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[13 May 2010 04:00 AM]



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