ए जालिम तू हँस ले जी भरकर...

समयचक्र ए जालिम तू हँस ले जी भरकरमेरे इन ताजे जख्मों को कुरेदकर.तेरा भी कल ऐसा वक्त आयेगातू जियेगा जब आहें भरभर कर । 0000जब याद किसी की आती हैए दिल मेरा बेकाबू हो जाता है .दिल को मेरे चैन तब आता हैजब दिलरुबा मेरे सामने होती है। 00000... [पूरी पोस्ट]
writer महेन्द्र मिश्र
views
20
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
21
[13 May 2010 04:00 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix