दूसरी क़िस्त- कौन चला बनवास रे जोगी
दूसरी क़िस्त में तीन शाइराओं की ग़ज़लें एक साथ मुलाहिज़ा कीजिए-देवी नांगरानीओढे शब्द लिबास रे जोगीआई ग़ज़ल है रास रे जोगीधूप में पास रहे परछाईंशाम को ले सन्यास रे जोगीछल से जल में आया नज़र जोचाँद लगा था पास रे जोगीहिम्मत टूटी,दिल भी टूटाटूटा जब विश्वास रे...
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सतपाल ख़याल
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[13 May 2010 02:47 AM]



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