यहाँ शब्द बिकते हैं!
बाबु जी यहाँ शब्द बिकते हैं
ये शब्दों का मेला है, मैंने भी दुकान सजा रक्खी है
मेरे भी शब्द देखो
ज़रा रूककर
प्रेम संवेदना सब कुछ है इनमे, देखो तो ज़रा रूककर
किस खूबसूरती से मैंने
शब्दों को सजा रक्खा है
और फिर दाम भी तो ज्यादा नहीं...
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nilesh mathur
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[13 May 2010 02:39 AM]



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