हमने कहा :ज्ञानदत्त जी से गलती हुई है खुशदीप बोले बुज़ुर्गो से भी गलतियां होती हैं...
समीरलाल ने जिस अंधड़ की ओर संकेत किया है स्पष्ट तौर पर एक चिंतनीय विषय है. अब वो समय आ गया है है जब कुछ अधिक सुस्पष्ट मुखर हो जाए ताकी ओछी-हरकतों को हवा न मिले , चलिये इस बीच प्रतिभा सक्सेना जी की कविता को मौका निकाल के देख लीजिये . अदा जी की कविता को भी...
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गिरीश बिल्लोरे
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[13 May 2010 00:15 AM]



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