संत कबीर के दोहे-बियावन वन के फूल बिना काम किसी के काम आये मुरझा जाते हैं
हाथी चढि के जो फिरै, ऊपर चंवर ढुरायलोग कहैं सुख भोगवे, सीधे दोजख जायसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि तो हाथी पर चढ़कर अपने ऊपर चंवर डुलवाते हैं और लोग समझते हैं कि वह सुख भोग रहे तो यह उनका भ्रम है वह तो अपने अभिमान के कारण सीधे नरक में जाते हैं।बड़ा...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[12 May 2010 23:08 PM]



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