आज मुझे कुछ कहना है-"बिखरे मोती" से
कुछ दिनों पहले दुपहरी में डाकिया आया एक अरसे के बाद डाक लेकर। नहीं तो डाक आनी ही बंद हो गयी ईमेल, मोबाईल, फ़ोन के चलन के बाद। बस किताबें या सरकारी चिट्ठियाँ ही आती हैं। उस दिन आया एक पार्सल खोला तो उसमें थी समीर भाई की कृति-"बिखरे मोती" । मैने उन्हे एक...
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ललित शर्मा
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[12 May 2010 22:27 PM]



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