एक नन्हे दोस्त का आपरेशन, जिसमें मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था - सतीश सक्सेना
उस दिन जब सदा की भांति मैं पार्क में पंहुचा तो हमेशा गेट पर पूंछ हिलाकर स्वागत करते एक दोस्त की कमी महसूस हुई ! वह एक २-३ वर्षीय कुतिया,जिसको मैं मिनी कहता था ,आज दिखाई नहीं दे रही थी ! पार्क में घुसते हुए मेरा स्वागत और जाते समय गेट तक आकर विदाई देना,...
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सतीश सक्सेना
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[12 May 2010 22:07 PM]



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