कि नारी तन मुझे देकर कर कृतारथ कर दिया ओ माँ !

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) कृतारथ कर दिया ओ माँ !कृतारथ कर दिया ओ माँ !सृजन की माल का मनका बना कर जो , कि नारी तन मुझे देकर कर कृतारथ कर दिया ओ माँ !*सिरजती एक नूतन अस्ति अपने ही स्वयं में रच ,इयत्ता स्वयं की संपूर्ण वितरित कर परं के हित ,नए आयाम सीमित चेतना को दे दिए... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee

कविता

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[12 May 2010 21:13 PM]

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