वरदान न मांगो
मौन चले जाओ निज पथ पर,युग युग की तुम प्यास छिपाए,मौन बढे जाओ निज पथ पर,अपनी चिर अभिलाष छिपाए,शूलों मे ही आह छुपा लो,मिट जाओ, पर दान न मांगो,यह जीवन है स्नेह समर्पित,तुम सुख का वरदान न मांगो.दीप की भांति तिल तिल कर,तुम जलते जाओ हंसते जाओ,दुख जीवन की एक...
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radhasaxena
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[12 May 2010 18:27 PM]



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