आईये फ़िर कव्वालीमय हो जायें....!!!
बस, आंख बन्द करें और गुम हो जायें...सखी बाली उमरिया थी मोरी,मोरे चिश्ती बलम चोरी चोरी,लूटी रे मोरे मन की नगरिया.......
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Neeraj Rohilla
कव्वाली
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[12 May 2010 14:49 PM]



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