हवा कुछ कहने आई है .........`तेज`
कहीं किसी बंजर मैदान से, कुछ पूराने वृछों से हवा बह आई है अकेले पड़े शमशान के कब्र से, आजादी की सुगंध संग लेकर आई हैहवा कुछ कहने आई है ।। जो भूल गये हैं कीमत आजादी की, उनको लम्बी नींद से जगाने आई हैपूराने पड़ चुके सोये जंगी हथियारों में, ...
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Tej Pratap Singh
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[12 May 2010 14:03 PM]



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