apni baat! Umesh Pathak ke saath.
रात हमारी आँखों से फ़िर बही कहानी अम्मा की, खिड़की से जब सटकर महकी रात की रानी अम्मा की!दादा की वो गिरी हवेली ,टुटा तुलसी का चौरा ,पिछवारे की नीम भी जाने ,उमर खपानी अम्मा की!हम लोगो को खिला-पिला के, जब अम्मा थक जाती थी,हमने देखी पानी पीकर, भूख छुपानी...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[12 May 2010 12:15 PM]



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