इसे नहीं पढ़ा तो क्या पढ़ा समझो ब्लॉगिंग निरर्थक गई : प्रस्तुति नवीन तिवारी
श्री नवीन तिवारी जी ने ई मेल से खास आपके लिए हैं भिजवाए । आप इसे पढ़ लें तो मुझे सुकून आये।जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते...
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अविनाश वाचस्पति
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[12 May 2010 11:51 AM]



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