ईशवाणी हमारे कल्याण के लिए अवतरित की गई है , यदि इस पर ध्यानपूर्वक चिंतन और व्यवहार किया जाए तो यह नफ़रत और तबाही के हरेक कारण को मिटाने में

वेद कुरआन वेदसमानं मन्त्रमभि मन्त्रये वःमैं तुम सबको समान मन्त्र से अभिमन्त्रित करता हूं ।ऋग्वेद , 10-191-3कुरआनकु़ल या अहलल किताबि तआलौ इला कलिमतिन सवाइम्-बयनना व बयनकुम तुम कहो कि हे पूर्व ग्रन्थ वालों ! हमारे और तुम्हारे बीच जो समान मन्त्र हैं , उसकी ओर आओ... [पूरी पोस्ट]
writer DR. ANWER JAMAL
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[12 May 2010 11:26 AM]

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