सीख, सरीखत और विनाशकारी विचार

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... वक्त इतना नहीं बीता कि, अभी सब कुछ ठीक न हो सके। सबकुछ समेटा जा सकता है। बहुआयामी विकास के जिस चेहरे और मोहरे को गढ़ने के चलते हमने बहुत कुछ खो दिया है। वो हम फिर से पा सकते है। भारत की विकास दर पर भले ही हल्ला होता है । लेकिन विकास की आड़ में बढ़ती... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[12 May 2010 10:29 AM]

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