मेरी ज़ात है ......

मेरी जात है .........अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा| उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी ? हाँ, यह हो सकता है कि जिन्हें आरक्षण नहीं देना है, उन सवर्णों से उनकी जात... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee

Culture

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[12 May 2010 10:27 AM]

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