दिल्लगी की मुश्किल
मुझको ये ईनाम मिला है, उस संगदिल की महफिल से‘‘दीवाना इक’’ नाम मिला है, उस संगदिल की महफिल सेडूबा, ये गम लेकर दिल में, कोई किनारा नहीं रहासारा नजारा देखा उसने, चुपचाप खड़े हो साहिल सेजिस पर की कुर्बान जान, भूला वही अनजान जानहँस हँस के बातें करता है, महफिल...
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Rajey Sha
ग़ज़ल
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[12 May 2010 10:16 AM]



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