चिंताजनक प्रश्न है हंसते-खेलते सब तक पहुंचने वाले दु:स्वप्न अभी तक ऐसा क्यों है कुछ लफंगों की पहुंच में नहीं आ रहे?..
पता नहीं कुछ कैसे अभागे लोग हैं दुनिया कहीं से कहीं पहुंच जाएगी मगर ऐसे चिरकुटों की हाय-हाय का असहायगान बंद नहीं होगा कि भाई साहब, भाई साहब, सुना बिलासपुर तक में आ रहे हैं, फिर ऐसा कैसे है कि हमारी तरफ आने में अभी भी अवरोध बना हुआ है? मतलब कुछ करिये,...
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Pramod Singh
पतनशील प्रसंग
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[12 May 2010 09:47 AM]



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