जिन्दगी...
कैसे कैसे लम्हों सेजिन्दगी गुज़रती है कभी खुशियों केपंख लगा के उडती है.तो कभी अथाह वेदनाओंमें ढलती है .हर तरफ से रिश्तों केहाथ छूटने से लगते हैं.प्यार के बंधन भीगांठे खोलते से लगते हैं.हूक सी दिल मेंशोर करती हैगूंगी घुटन भीपलकों कीझिर्रियों सेबेबसी के...
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अनामिका की सदाये......
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[12 May 2010 09:49 AM]



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