एक रंग जो ठहरा सा बस लगता है...
बहुत दिनों से इंतजार में हूँ, इंतजार कुछ लंबा ही होता जा रहा है. मज़ा ये भी है कि ये तक पता नहीं कि इंतज़ार किसका है. जुम्मा-जुमा कायदे से 2 पोस्ट भी नहीं लिखीं कि लगा, कि कुछ मज़ा आ जाए ऐसा कुछ समझ में आए तो पोस्ट किया जाए... ब्लॉग शुरू करने के पहले जो...
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विवेक.
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[12 May 2010 09:09 AM]



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