भटकन ....

बिखरे  मोती ख्वाब - ज्यों  ओस की बूंद  हाथ लगाओ तो  पानी बन जाती है  हकीकत का ताप  देता है सुखा  और हम  ज़िन्दगी के  रेगिस्तान में  भटकते रह जाते हैं .... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[12 May 2010 09:06 AM]

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