क्या अँधा के जागे और क्या अंधा के सोये... !!

मनोज -- करण समस्तीपुरी रे भैय्या, आल इज वेल........ ! उधर है न आल इज वेल.... ? इधर तो कुच्छो वेल नहीं है। समझो कि दरोगा जी, चोरी हो गयी। घोर-कलियुग आ गया है। सतयुग में तो सब ठीके-ठाक चल रहा था। त्रेता में रावण रामजी की लुगाई चुरा ले गया.... । द्वापर में तो... [पूरी पोस्ट]
writer मनोज कुमार

करण समस्तीपुरी

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[12 May 2010 08:53 AM]

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