इधर की कथा में मृत्यु कभी भी आ सकती है
इन दिनों जी गईं और महसूस की गईं कविताओं से हम सम्पादकों का बहुत कम ही वास्ता पड़ता है। लेकिन मनोज कुमार झा की कविताओं में उनके आस-पास का सच उसी विद्रूपता के साथ दिखाई पड़ता है, जैसा वो होता है। अपनी ख़ास शैली में अपनी बात कहने वाले मनोज खाँटी देशज़...
[पूरी पोस्ट]
नियंत्रक । Admin
manoj kumar jha
11
1
0
1
7
[12 May 2010 07:51 AM]



Shuffle








