इधर की कथा में मृत्‍यु कभी भी आ सकती है

हिन्द-युग्म इन दिनों जी गईं और महसूस की गईं कविताओं से हम सम्पादकों का बहुत कम ही वास्ता पड़ता है। लेकिन मनोज कुमार झा की कविताओं में उनके आस-पास का सच उसी विद्रूपता के साथ दिखाई पड़ता है, जैसा वो होता है। अपनी ख़ास शैली में अपनी बात कहने वाले मनोज खाँटी देशज़... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

manoj kumar jha

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[12 May 2010 07:51 AM]

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