माननीयों को चाहिए बस मकान....फिर क्यों करें काम

जुगाली हमारे परमपूज्य और आदरणीय "माननीयों" को तो बस मकान चाहिए ,कैसे भी ?किसी भी नियम को तोड़कर या फिर कोई भी नया नियम बनाकर .माननीयों से मेरा आशय हमारे सांसदों और विधायकों से है.चूकिं बार बार संसद-विधायक लिकने में टाइम खर्च होगा और फिर इनका सम्मान भी काम हो... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev
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[12 May 2010 07:40 AM]

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