"मेरा हिन्दुस्तान!" (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
नेताओं का बदल गया है, धर्म और ईमान, जितने बड़े करें घोटाले, उतने बनें महान, सारा जग करता गुणगान, ये है मेरा हिन्दुस्तान। भूखी-नंगी जनता को, भाषण से ही भरमाता, प्रश्न उठाने को संसद में, भारी नोट कमाता, कोठी, बंगला, कार विदेशी, पाल रहा ये श्वान, सारा जग...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
गीत
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[12 May 2010 07:36 AM]



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