पूर्ण समर्पण
जो हुआ ठीक हुआ बीत गया सो बात गयी सुबह नयी है फिर से आया है सूरज आकाश में हवा भी तो इठलाती बल खाती चलती है साथ में अपने हाथ फैला कर रख लो होने वाली है सपनो की बरसात पास में कदमों को यूँ उठा कर चलो दिशाएं नृत्य करने लगें साथ [...]...
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swaarth
poetryGodacceptancecomplete surrender
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[12 May 2010 03:57 AM]



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