मुक्तक : माँ के प्रति प्रणतांजलि: संजीव 'सलिल'
माँ के प्रति प्रणतांजलि: तन पुलकित, मन सुरभित करतीं, माँ की सुधियाँ पुरवाई सी.
दोहा गीत गजल कुण्डलिनी, मुक्तक छप्पय रूबाई सी..
मन को हुलसित-पुलकित करतीं, यादें 'सलिल' डुबातीं दुख में-
होरी गारी बन्ना बन्नी, सोहर चैती शहनाई सी.. *
मानस पट पर अंकित नित नव...
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दिव्य नर्मदा divya narmada
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[07 May 2010 12:15 PM]



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