भ्रष्टाचार- रिस रहा है मवाद
हिमानी दीवानआस पास से शुरू करे तो सब कुछ खूबसूरत लगता है। रोटी और सुकून के लिए जद्दोजहद करते चेहरों के बीच यह कहना बेहद मुश्किल हैं की कौन भ्रष्ट है। एक-एक चेहरे को परखने लगे तो सभी और सबके भीतर झाँके तो कोई भी नही। फिर भी क्यों हमारी छवि भ्रष्ट होती जा...
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himani deewan
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[12 May 2010 02:08 AM]



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