इतनी सी नमी

safar ke sajde mein कागद काले हैं कियेया धड़कन को पिरोया साँसों मेंनजर-नजर का फेर हैगीत बन जाते , शब्दों के हेर-फेर सेअजनबी से लगते हैंदिल का साज छेड़ कर देखोतराने बुनते हैंसागर अँजुली में लिएये वो दोना हैपी ले तो अपना सा हैछूटे तो धरती पर बिखरेकागद काले हैं कियेइसी के दम पे... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[12 May 2010 02:14 AM]

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