दर्द के लिए दवा के तौर पर दर्द की तलाश

अस्तित्व बेचैन दिन और तपती-सी रातें हैं.... उद्वेलन, उलझन और विषाद की पर्तें चढ़ने लगी है। होने पर सवाल और मुट्ठी में बँधी रेत-सी फिसलती....साँसों का अहसास.... हो पाने का अहसास और होने को बहा दिए जाने की तीखी ख्वाहिश..... ऐसे ही तपते, उलझे और मुश्किल दिनों में... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव
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[12 May 2010 01:43 AM]

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