लौट आ, ओ धार!

Ek ziddi dhun लौट आ, ओ धार!टूट मत ओ साँझ के पत्थरहृदय पर।(मैं समय की एक लंबी आह!मौन लंबी आह!)लौट आ, ओ फूल की पंखडी!फिरफूल में लग जा।चूमता है धूल का फूलकोई, हाय!!***आज शमशेर जी का जन्मदिन है. उनकी यह तस्वीर जापान के क्योटो से लक्ष्मीधर मालवीय से वाया असद ज़ैदी प्राप्त... [पूरी पोस्ट]
writer Ek ziddi dhun
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[12 May 2010 00:15 AM]

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