संत कबीरदास के दोहे-मित्रता से भक्ति और सत्संग में बाधा आती है (bhakti aur satsang-kabir das ji ke dohe)
दुनिया सेती दोसती, होय भजन के भंग। एका एकी राम सों, कै साधुन के संग।।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि दुनिया के लोगों के साथ मित्रता बढ़ाने से भगवान की भक्ति में बाधा आती है। एकांत में बैठकर भगवान राम का स्मरण करना चाहिये या साधुओं की संगत करना...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[11 May 2010 23:38 PM]



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