चाणक्य दर्शन-धैये हो तो धनाभाव संकट नहीं बनता (dhiraj hi dhan hai-chankya neeti)
दरिद्रता श्रीरतया विराजते कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।कदन्नता चोष्णतया विराजते कुरूपता शीतया विराजते।।हिंदी में भावार्थ- अगर मनुष्य में धीरज हो तो गरीबी की पीड़ा नहीं होती। घटिया वस्त्र धोया जाये तो वह भी पहनने योग्य हो जाता है। बुरा अन्न भी गरम होने पर...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
आध्यात्म
14
2
0
2
2
[11 May 2010 23:45 PM]



Shuffle







