पतंजलि योग साहित्य-जात पांत से मुक्त होने पर ही जीवन का आनंद

शब्दयोग सारथी-पत्रिका जातिदेशकालसमयानमच्छिन्नाः सार्वभौमा महाव्रतम्।हिन्दी में भावार्थ-जाति, देश, काल तथा व्यक्तिगत सीमा से रहित होकर सावैभौमिक विचार का हो जाने पर मनुष्य एक महावत की तरह हो जाता है।वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-महर्षि पतंजलि यहां पर मनुष्य को संकीर्ण... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

आध्यात्म

views
12
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
1
[11 May 2010 23:53 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix