gazal k bahane
हो गई फ़िर से खता हैदिल तुझे जो दे दिया है गम से बचकर है निकलनाप्यार ही इक रास्ता है आ रही शायद वही हैदिल मेरा जो झूमता हैहै धरा अपनी हंसी इतनीचाँद पीछे घूमता है ढूंढता है ‘श्याम किसकोदिल...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[11 May 2010 23:22 PM]



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