छत्तीसगढ़ी हायकू

गुरतुर गोठ बिन पानी के।सावन-भादो! जेठ।मन उदास।x ठग-ठग के।तैं बिलवा बादर।कांहां बुलबे?x बिगन पानी।कइसे होही खेती।संसो लागथे।x बिचारे हस?निरदई बादर।मन के पीरा।x पीरा ओनहा।पीरा दसना पी-ले।खा ले पीरा ल।विट्ठल राम साहू 'निश्छल'मौंवहारी भाठामहासमुन्द... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

विट्ठल राम साहू 'निश्छल'

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[11 May 2010 22:45 PM]

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